श्री राम जाटव की कहानी में उनकी दुश्मनी का जिक्र सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में किया जाता है। उनके बारे में बताए गए कथन के अनुसार, उनकी पुरानी दुश्मनी करोड़ीमल गुर्जर से थी। यह दुश्मनी अचानक शुरू नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे एक पारिवारिक घटना को वजह बताया जाता है।
बताया जाता है कि करोड़ीमल गुर्जर और उसके कुछ साथियों ने मिलकर श्री राम जाटव के पिता की हत्या कर दी थी। पिता की मौत की खबर और इस घटना ने श्री राम जाटव के जीवन पर गहरा असर डाला। इसके बाद उनके मन में अपने पिता की मौत का बदला लेने की भावना पैदा हुई।
कथन के अनुसार, इसी घटना के बाद श्री राम जाटव और करोड़ीमल गुर्जर के बीच दुश्मनी और भी गहरी हो गई। श्री राम जाटव ने अपने पिता की मौत का बदला लेने का फैसला किया और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष की कहानी सामने आती है।
यही घटना श्री राम जाटव के जीवन में एक बड़े मोड़ के रूप में बताई जाती है। उनके बारे में कहा जाता है कि पिता की हत्या के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बदले की इस कहानी ने आगे चलकर उनके जीवन और उनके कथित आपराधिक सफर को एक अलग दिशा दे दी।